Kind Attention:

The postings in this blog are purely my personal views, and have nothing to do any commitment from Government, organization and other persons. The views in general respect all sections of society irrespective of class, race, religion, group, country or region, and are dedicated to pan-humanity. I sincerely apologize if any of my writing has hurt someone's sentiments even in the slightest way. Suggestions and comments are welcome.

Saturday, 4 May 2019

बाप

 बाप 
------

दिखता रूखा-सूखा, सख़्त-डाँटता, कदाचित सुस्त-अनावश्यक भी
कभी भोला, विश्व-व्यवहारिकता से परे, अबल-असहाय सा कभी। 

कभी अन्य उसपर हँसते भी दिखते, उड़ाते लोग सादगी का व्यंग 
कभी किसी दबंग की खुशामद करता, कभी शेखी भी कमतर पर। 
कभी अर्धांगिनी से झगड़ता, कभी संतानों को कड़ी डाँट-फटकार 
कभी रुग्ण-लाचारी में निरुद्देश्य ताके, कभी विद्वता-ज्ञान बखान। 

कभी शारीरिक बल में अन्यों से अल्प, कभी मुकाबले में कुछ श्रेष्ठ 
निकटस्थों से तुलना भी, वह साहसी-वीर-दयालु, क्षीण या बदमाश। 
कभी रिश्तेदारों में यशस्वी प्रतीत, कभी नर तंज भरते व्यक्तित्व पर 
लोक की तो अति समझ न, पर अचरज उसके भिन्न रूप देखकर। 

विवेक से तुमने देखना शुरू किया, अपने से ही दिए तकिए-कलाम  
उस व्यक्ति से टकराव भी, सब बातें न ठीक, विद्रोह को चाहता मन। 
अति ऊल-जुलूल संदेह मन में पाला, लगता हमारा ध्यान ही न रखता 
चाहे अगला स्व-प्राण भी लगा दे, पर श्रद्धालु बनने न देती कृतघ्नता। 

बचपन में जो वट-वृक्ष सा था, जैसे वय-वृद्धि सर्व-दोष समक्ष आगमन 
कई झूठी-सच्ची सूचनाओं से एक विशेष राय शख्स के बारे में निर्माण। 
न समझ पाते वह भी एक इंसान है, उसमें भी सब देव-दानवों का वास  
क्यों बहुत बड़ा होने की अपेक्षा, शांत चुपचाप सा अपना करता काम। 

उतना शिक्षित न जितने तुम, तथापि सोचो तुमको बनाया किस लायक 
आज तमाम कटाक्ष करने में समर्थ, कभी दूर हो निज हैसियत लो देख। 
लाचार सा वह तुम्हें आशा-नेत्रों से देखता, तुम्हारा सदा बेरुखा व्यवहार 
और भी जग, सेवा-संबंधित दायित्व, दिन-रैन खटता तुम्हें देता आराम। 

उसकी मंशा तुम चरम-लक्ष्य प्राप्त करो, निज चिंता न कर लेगा गुजर 
पर बाप है सब झेल लेगा, तुम खुश रहो उसकी यही अभिलाषा मात्र। 
पर समझो कभी तुम भी अभिभावक बनोगे, तुममें भी सब गुण-दोष  
जग की समरसता समझो, पिता के भलेपन को सस्ते में मत नकारो। 

पवन कुमार,
४ मई, २०१९ समय २३:२० रात्रि 
(मेरी डायरी ३ जुलाई, २०१८ समय ८:५० बजे प्रातः से)  

No comments:

Post a Comment